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Ramayana· Sarga 29(25 verses)
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रामायण

Ramayana · Yuddha Kanda – Sarga 29

25 verses

29 of 128 Sargas

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Yuddha Kanda — Sarga 29

युद्धकाण्ड · सर्ग 29

Sarga 29 of 128 in Yuddha Kanda

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v1

शुकेन तु समाख्यातांस् तान् दृष्ट्वा हरि यूथपान् | लक्ष्मणम् च महावीर्यम् भुजम् रामस्य दक्षिणम् || २-२९-१ समीपस्थम् च रामस्य भ्रातरम् स्वम् विभीषणम् | सर्व वानर राजम् च सुग्रीवम् भीम विक्रमम् || २-२९-२ अङ्गदम् चापि बलिनम् वज्रहस्तात्मजात्मजम् | हनूमन्तम् च विक्रान्तम् जाम्बवन्तम् च दुर्जयम् || २-२९-३ सुषेणम् कुमुदम् नीलम् नलम् च प्लवगर्षभम् | गजम् गवाक्षम् शरभम् वैन्दम् च द्विविदम् तथा || २-२९-४ किंचिद् आविग्न हृदयो जात क्रोधः च रावणः | भर्त्सयाम् आस तौ वीरौ कथा अन्ते शुक सारणौ || २-२९-५

Beholding those foremost of monkey leaders pointed out by Shuka- the most valiant Lakshmana; Rama's right arm, his own brother Vibhishana standing close to Rama, the terribly powerful Sugreeva the king of all monkeys, the strong Angada grandson of Indra the wielder of thunderbolt, the powerful Hanuman, the imincible Jambavan, Sushena, Kumuda, Nila, Nala the excellent of monkeys, Gaja, Gavaksha, Sharabha, Mainda and Dvivida- that Ravana - his heart became agitated a little, was enraged and then abused those two heroes Shuka and Sarana who had completed their report.

यह श्लोक रामायण के सुंदरकांड का अंश है। इसका सरल हिंदी अनुवाद इस प्रकार है: यह देखकर कि वानरों के राजा सुग्रीव, हनुमान, अंगद, जाम्बवान, नल, नील, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, गंधर्व, ग

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v2

अधो मुखौ तौ प्रणताव् अब्रवीत् शुक सारणौ | रोष गद्गदया वाचा सम्रब्धः परुषम् वचः || २-२९-६

Ravana spoke (the following) excited and harsh words, in a voice choked in anger to Shuka and Sarana who stood saluting with their faces bent down.

नीचे मुख किए हुए दोनों तोतों से श्री राम ने कहा। क्रोध से भरी हुई वाणी में, वे दोनों तोते उत्तेजित होकर कठोर वचन बोले।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v3

न तावत् सदृशम् नाम सचिवैर् उपजीविभिः | विप्रियम् नृपतेर् वक्तुम् निग्रह प्रग्रहे विभोः || २-२९-७

"It is not befitting to utter unpleasant words by dependent ministers to their king who has the power to mete out any punishment or reward."

राजा के मंत्री और सेवक राजा को अप्रिय लगने वाली बात कहने का साहस नहीं कर सकते, क्योंकि राजा के पास दंड देने और रोकने की शक्ति होती है।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v4

रिपूणाम् प्रतिकूलानाम् युद्ध अर्थम् अभिवर्तताम् | उभाभ्याम् सदृशम् नाम वक्तुम् अप्रस्तवे स्तवम् || २-२९-८

"Is it proper for both of you to shower irrelevant praise on our enemies who are adverse to us and are approaching for a war?"

शत्रुओं और प्रतिकूल लोगों के युद्ध के लिए आने पर, ऐसे समय में उनकी प्रशंसा करना उचित नहीं है।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v5

आचार्या गुरवो वृद्धा वृथा वाम् पर्युपासिताः | सारम् यद् राज शास्त्राणाम् अनुजीव्यम् न गृह्यते || २-२९-९

"In vain have you sat at the feet of your elders, your preceptors and the aged, since the essence to be followed from political sciences has not been grasped by both of you."

आचार्य, गुरुजन और वृद्धजन की सेवा व्यर्थ है, यदि आपने राजशास्त्रों का सार ग्रहण नहीं किया है।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v6

गृहीतो वा न विज्ञातो भारो ज्ञानस्य वा उच्यते | ईदृशैः सचिवैर् युक्तो मूर्खैर् दिष्ट्या धरामि अहम् || २-२९-१०

"Or if you have imbibed them, you have not remembered them. You are over-burdened with ignorance! Being associated with such foolish ministers, it is a miracle that I am still able to retain my sovereignty."

यहाँ संस्कृत श्लोक का सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है: ज्ञान को या तो ग्रहण किया गया है या नहीं समझा गया है, यह ज्ञान का भार ही कहलाता है। ऐसे मूर्ख मंत्रियों से युक्त होने के कारण, मैं भाग्य से ही पृथ्वी पर हूँ।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v7

किम् नु मृत्योर् भयम् न अस्ति माम् वक्तुम् परुषम् वचः | यस्य मे शासतो जिह्वा प्रयच्चति शुभ अशुभम् || २-२९-११

"Have you no fear of death that you dare address me thus rudely, I whose tongue that you dare tongue dispenses good and evil?"

मृत्यु से क्या भय है, जो मुझे कठोर वचन कहने से रोके? मेरी जिह्वा तो शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के वचन बोलती है।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v8

अपि एव दहनम् स्पृष्ट्वा वने तिष्ठन्ति पादपाः | राज दोष परामृष्टास् तिष्ठन्ते न अपराधिनः || २-२९-१२

"Trees may survive in the forest, even if disturbed by fire. But the guilty cannot survive, if touched by the royal scepter."

वन में आग लगने पर भी वृक्ष खड़े रहते हैं, परंतु राजा के दोष से प्रभावित अपराधी खड़े नहीं रह सकते।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v9

हन्याम् अहम् इमौ पापौ शत्रु पक्ष प्रशंसकौ | यदि पूर्व उपकारैर् मे न क्रोधो मृदुताम् व्रजेत् || २-२९-१३

"If my anger is not softened by the services they rendered earlier, I would have killed thse two miscreants who are praising the band of enemies."

मैं इन दोनों पापियों को मार डालूंगा जो मेरे शत्रुओं की प्रशंसा करते हैं, यदि मेरे पूर्व उपकारों ने मेरे क्रोध को कोमल न बनाया होता।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v10

अपध्वंसत गच्चध्वम् सम्निकर्षाद् इतो मम | न हि वाम् हन्तुम् इच्चामि स्मरन्न् उपकृतानि वाम् || २-२९-१४ हताव् एव कृतघ्नौ तौ मयि स्नेह परान् मुखौ |

"Keep away from my neighbourhood. Do not be seen anywhere here. I am recollecting your past services and hence do not wish to kill you. Both of you, who are ungrateful and unfaithful towards me, are just as dead to me."

यहाँ संस्कृत श्लोक का सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है: तुम दोनों यहाँ से दूर चले जाओ, क्योंकि मैं तुम दोनों को मारना नहीं चाहता, तुम्हारे उपकारों को याद करके। विश्वासघातियों को मार ही देना चाहिए, जो मुझ पर स्नेह न रखकर दूसरों की ओर मुख करते हैं।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v11

एवम् उक्तौ तु सव्रीडौ ताव् उभौ शुक सारणौ || २-२९-१५ रावणम् जय शब्देन प्रतिनन्द्य अभिनिह्सृतौ |

Hearing Ravana's words, Shuka and Sarana felt ashamed to see Ravana paid obeisance to him saying, "Be thou victorious!" and went away.

जब रावण ने ऐसा कहा, तो दोनों तोते, शुक और सारण, लज्जित होकर, "जय हो!" कहकर उसका अभिवादन करते हुए चले गए।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v12

अब्रवीत् स दशग्रीवः समीपस्थम् महाउदरम् || २-२९-१६ उपस्थापय शीघ्रम् मे चारान् नीति विशारदान् |

The demon Ravana spoke to Mahodara who was standing nearby as follows: "Bring me the spies here quickly."

रावण ने अपने पास खड़े विशाल पेट वाले मंत्री से कहा, "मेरे लिए तुरंत कुशल दूतों को बुलाओ।"

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v13

महोदरस्तथोक्तस्तु शीघ्रमाज्ञापयच्चरान् || २-२९-१७ ततश्चाराः सम्त्वरिताः प्राप्ताः पार्थिवशासनात् | उपस्थिथाः प्राञ्जलयो वर्धयित्वा जयाशिषः || २-२९-१८

Hearing those words, Mahodara immediately ordered for the spies. The spies came hurriedly as per the orders of the king, paid obeisance to him by joining their palms and approached him, having made a complement expressing their desire to see him victorious.

महोदर ने आज्ञा दी और दूत शीघ्रता से गए। राजा के आदेश पर वे तुरंत उपस्थित हुए और हाथ जोड़कर जय की कामना करते हुए खड़े हो गए।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v14

तान् अब्रवीत् ततो वाक्यम् रावणो राक्षस अधिपः || २-२९-१९ चारान् प्रत्ययिकान् शूरान् भक्तान् विगत साध्वसान् |

Then, Ravana the king of demons spoke the following words to those spies, who were faithful, brave, energetic and free from fear:

रावण, राक्षसों के राजा ने, उन गुप्तचरों से कहा जो शूरवीर, निष्ठावान और निर्भय थे।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v15

इतो गच्चत रामस्य व्यवसायम् परीक्षथ || २-२९-२० मन्त्रेष्व् अभ्यन्तरा ये अस्य प्रीत्या तेन समागताः |

"You go from here to investigate about the first impression concerning Rama, as regards who are his intimate friends and in respect of those who joined on his side with a liking towards him."

यहाँ संस्कृत श्लोक का सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है: यहाँ से जाकर राम के व्यवसाय की परीक्षा करो। जो लोग मंत्रों में उसके प्रिय हैं, वे उससे प्रेम से मिले हैं।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v16

कथम् स्वपिति जागर्ति किम् अन्यच् च करिष्यति || २-२९-२१ विज्ञाय निपुणम् सर्वम् आगन्तव्यम् अशेषतः |

"Find out what are his hours of sleeping and waking and what he intends to do next. You ought to come here, after acquainting with all this information completely and skillfully."

वह कैसे सोता है, कैसे जागता है, और और क्या करेगा, यह सब अच्छी तरह से जानकर, पूरी तरह से आना चाहिए।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v17

चारेण विदितः शत्रुः पण्डितैर् वसुधा अधिपैः || २-२९-२२ युद्धे स्वल्पेन यत्नेन समासाद्य निरस्यते |

"An enemy in battle, got known through spies by kings, will be defeated with only a little of effort."

गुप्तचरों द्वारा ज्ञात शत्रु को बुद्धिमान राजा युद्ध में थोड़े से प्रयास से ही जीत लेते हैं।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v18

चारास् तु ते तथा इति उक्त्वा प्रहृष्टा राक्षस ईश्वरम् || २-२९-२३ शार्दूलमग्रतः कृत्वा ततश्चक्रुः प्रदक्षिणम् |

Those spies on their part delightfully replied, "May it be so", kept Shardula in their front and made their circumambulation clockwise around Ravana.

राक्षसों के राजा ने "चारों ओर से घेर लो" ऐसा कहकर प्रसन्नतापूर्वक शार्दूल को आगे करके उनकी परिक्रमा की।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v19

ततस्तम् तु महात्मानम् चारा राक्षससत्तमम् || २-२९-२४ कृत्वा प्रदक्षिणम् जग्मुर् यत्र रामः सलक्ष्मणः |

Having thus made circumambulation to Ravana the excellent and the distinguished demon, the spies went to the place where Rama along with Lakshmana were there.

तब वे महात्मा राक्षसराज को नमस्कार करके, जहाँ लक्ष्मण सहित श्रीराम थे, वहाँ गए।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v20

ते सुवेलस्य शैलस्य समीपे राम लक्ष्मणौ || २-२९-२५ प्रच्चन्ना ददृशुर् गत्वा ससुग्रीव विभीषणौ |

Having gone in a disguised manner, those spies saw Rama and Lakshman together with Sugreeva and Vibhishana in the neighbourhood of Mountain Suvela.

राम और लक्ष्मण, सुग्रीव और विभीषण के साथ, उस सुवेल पर्वत के पास छिपकर गए और उन्होंने देखा।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v21

प्रेक्षमाणाश्चमूम् ताम् च बभूवुर्भयविह्वलाः || २-२९-२६ ते तु धर्म आत्मना दृष्टा राक्षस इन्द्रेण राक्षसाः |

Seeing that army, those demons became overwhelmed with fear. However, they were observed by the high-souled Vibhishana the Lord of demons.

वे राक्षस, जिन्हें धर्मनिष्ठ आत्मा वाले इंद्र ने देखा था, उस सेना को देखकर भय से व्याकुल हो गए।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v22

विभीषणेन तत्रस्था निगृहीता यदृच्चया || २-२९-२७ शार्दूलो ग्राहितस्त्वेकः पापोऽयमिति राक्षसः |

Accidentally, the deomons there were caught by Vibhishana, who said that the demon Shardula among them was wicked and got him alone seized.

विभीषण ने वहाँ उपस्थित सभी को यदृच्छया (बिना किसी विशेष कारण के) रोका। राक्षस ने शार्दूल को यह कहकर पकड़ लिया कि वह पापी है।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v23

मोक्षितः सोऽपि रामेण वध्यमानः प्लवङ्गमैः || २-२९-२८ अनृशंसेन रामेण मोक्षिता राक्षसाः सरे |

That Shardula also, who was going to be killed by the monkeys, was got released by Rama. The other demons also were got released by Rama, the kind man.

यहाँ संस्कृत श्लोक का सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है: राम ने वानरों द्वारा मारे जा रहे उस राक्षस को भी मुक्त कर दिया। दयालु राम ने राक्षसों को बाणों से मुक्त कर दिया।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v24

वानरैर् अर्दितास् ते तु विक्रान्तैर् लघु विक्रमैः || २-२९-२९ पुनर् लंकाम् अनुप्राप्ताः श्वसन्तो नष्ट चेतसः |

Those demons, harassed by the courageous and the quick-paced monkeys, became insensible, heaved a sigh and reached back Lanka.

वानरों द्वारा सताए जाने पर, वे वीर और फुर्तीले वानर, हाँफते हुए और चेतना खोकर, पुनः लंका लौट आए।

Yuddha Kanda – Sarga 29 · v25

ततो दशग्रीवम् उपस्थितास् ते | चारा बहिर् नित्य चरा निशा चराः | गिरेः सुवेलस्य समीप वासिनम् | न्यवेदयन् भीम बलम् महाबलाः || २-२९-३०

Those spies, who always wander outside and who were valiant rangers of the night, thereafter approached Ravana and informed him that Rama's army was camping in the vicinity of the Suvela mountain.

तब सुवेल पर्वत के पास रहने वाले, रात में घूमने वाले और नित्य घूमने वाले गुप्तचरों ने वहाँ उपस्थित रावण को सूचित किया कि महाबली राक्षसों ने भयानक बल का प्रदर्शन किया है।

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